अधूरी बात
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जो होते होते रेह गयी बात ..
उसे अधूरी ही रहने दो
क्या हुआ जो न मिले तुम,
अकेला था, अकेले ही रेहने दो

उमीदों से कभी बनी नहीं,
ख्वाहिशें ने ही रुलाया हमेशा
अब जो तुम नहीं,एक सुकून सा है,
ये जो सुकून है,इसे ऐसे ही रेहने दो..

धुप तो नहीं,बादल बहुत मिले,
उनकी छाँव मेरे ऊपर है,
और इस बारिश में भी एक नशीली बात है..
ये जो नशा है,मुझे इसमें बहने दो..

जो बात अधूरी रेह गयी ,
उसे अधूरी ही रेहने दो...

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