बारिश
बारिश आज गिर रही थी बाहर
भीगा हुआ मेरा मन था
बहार एक तूफ़ान सा उठा था
मेरे अंदर का तूफ़ान, वो क्या काम था ...?
एक भटकता हुआ मुसाफिर ,
जिसे राह में कोई मिला था
आज उस मुसाफिर और मेरी रहे भी अलग हैं ,
आसमान से बरसता , वो क्या मेरा गम था...?
समझना चाहिए था मुझे,
अब तो आदत भी हो गयी है ऐसी
फिर भी पीछे मुड़ के देख रहा हूँ,
क्या जिसे खोया , वही मेरा हमसफ़र था ...?
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